Bhagwan Rijhela Rijhawela Kaun Gunwa Se (Lyrics & Meaning)

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से: Bhojpuri Bhajan Lyrics & Deep Meaning

भूमिका – एक लोक गीत में छिपा वेदों का सार

Bhagwan Rijhela Rijhawela: भक्ति मार्ग में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि ईश्वर को कैसे प्रसन्न किया जाए? क्या वे कठिन तपस्या से मिलते हैं, बड़े अनुष्ठानों से, या अपार धन-संपत्ति से? पूर्वांचल और भोजपुर क्षेत्र (बिहार-उत्तर प्रदेश) के इस प्राचीन और दुर्लभ लोक भजन “भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से” में इसी गूढ़ प्रश्न का उत्तर छिपा है।

पीढ़ियों से गाए जाने वाले इस भजन में बड़े ही मीठे और ठेठ भोजपुरी शब्दों में बताया गया है कि भगवान केवल ‘भाव’ (सच्चे प्रेम) के भूखे हैं। आइए पढ़ते हैं इस अद्भुत निर्गुण/सगुण भजन के बोल और समझते हैं इसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ।

यह भजन मैंने बचपन में अपने घर के बुजुर्गों से सुना था। उस समय इसके शब्द समझ में नहीं आते थे, लेकिन आज जब अर्थ पर मनन करता हूँ, तो लगता है कि यह लोक गीत वास्तव में वेदों का सार कह देता है।

यह भजन किस परंपरा से जुड़ा है?

यह भजन पूर्वांचल और भोजपुर क्षेत्र की मौखिक लोक परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसे किसी एक कवि ने लिखकर प्रकाशित नहीं किया, बल्कि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाया और सीखा गया। ऐसे लोक भजन अक्सर निर्गुण और सगुण भक्ति के संगम पर खड़े होते हैं, जहाँ भगवान का नाम, लीला और कृपा का भाव एक साथ व्यक्त होता है।

इस भजन में भगवान से सीधा संवाद है, जो निर्गुण संत परंपरा की शैली को दर्शाता है, जबकि केवट और अजामिल जैसे प्रसंग सगुण राम-कृष्ण भक्ति की झलक देते हैं।

यह समन्वय ही इसे विशिष्ट बनाता है।

Bhagwan Rijhela Rijhawela Kaun Gunwa Se (Lyrics in Hindi & English)

[स्थायी / Chorus] 

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से 

कवन गुणवा से हो कवन गुणवा से 

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से 

(Bhagwan rijhela rijhawela kawan gunwa se, 

Kawan gunwa se ho kawan gunwa se, 

Bhagwan rijhela rijhawela kawan gunwa se)

[अंतरा 1 / Stanza 1] 

आजिले त केहू ना जानल प्रभु जी राउर नीति 

आजले त कोई ना जानल राघव राउर नीति 

केकरा से तू बैर करेला आ केकरा से प्रीति 

आपन केकरा के बनावेल कवन गुणवा से 

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से 

(Aajile ta kehu na jaanal Prabhu ji raaur neeti, 

Aajle ta koi na jaanal Raghav raaur neeti, 

Kekra se tu bair karela aa kekra se preeti, 

Aapan kekra ke banawela kawan gunwa se, 

Bhagwan rijhela…)

[अंतरा 2 / Stanza 2] 

रहा अजामिल का बेटा नारायण सबसे प्यारा 

हे नारायण हमे बचा लो अंतिम बार पुकारा 

लेके चक्र सुदर्शन धावेल कवन गुणवा से 

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से 

(Raha Ajamil ka beta Narayan sabse pyara, 

He Narayan humein bacha lo antim baar pukara, 

Leke Chakra Sudarshan dhawela kawan gunwa se, 

Bhagwan rijhela…)

[अंतरा 3 / Stanza 3] 

एको बार ब्रह्म पग धोए जब बामन अवतार 

दूजी बार सिया जी के देके लिहले जनक पखार 

केवट से सेतिहे में धोवावेल कवन गुणवा से 

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से 

(Eko baar Brahma pag dhoye jab Baman avatar, 

Duji baar Siya ji ke deke lihle Janak pakhaar, 

Kevat se setihe mein dhowawela kawan gunwa se, 

Bhagwan rijhela…)

[अंतरा 4 / Stanza 4] 

बड़ा बड़ा तमासा भइल रह गई ल मुसुकाके 

बानर भालू के उल्टा कपड़ा देखी के हंस ठठाके 

भगवान हसेल हसावेल कवन गुणवा से 

भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से 

(Bada bada tamasha bhail rah gai la musukake, 

Banar bhalu ke ulta kapda dekhi ke hans thathake, 

Bhagwan hasela hasawela kawan gunwa se, 

Bhagwan rijhela…)

Bhojpuri Nirgun Bhajan Bhagwan Rijhela Rijhawela meaning and Ramcharitmanas context
Bhagwan Rijhela Rijhawela Kaun Gunwa Se

संपूर्ण भावार्थ (Meaning & Interpretation)

इस भजन की सबसे बड़ी सुंदरता यह है कि यह सीधे ईश्वर से संवाद करता है। इसमें प्रयुक्त शब्द ‘रिझेला’ का अर्थ है ‘प्रसन्न होना’ या ‘मुग्ध होना’।

1. प्रभु की रहस्यमयी नीति (The Mystery of His Grace)

“आजिले त केहू ना जानल प्रभु जी राउर नीति…”

भक्त भगवान से कहता है कि हे राघव! आज तक कोई आपकी नीति नहीं समझ पाया। आप कब, किस पर कृपा कर दें, और किसे अपना बना लें, यह किसी कर्मकांड से तय नहीं होता। संसार के लोग जिसे बड़ा मानते हैं, आप उसे छोड़ देते हैं, और जिसे दुनिया त्याग देती है, आप उसे अपना लेते हैं।

2. अजामिल का प्रसंग (The Power of the Lord’s Name)

“रहा अजामिल का बेटा नारायण सबसे प्यारा…”

अजामिल एक पापी ब्राह्मण था, जिसने जीवन भर कोई पुण्य नहीं किया। मृत्यु के समय जब यमदूत आए, तो उसने भयभीत होकर अपने छोटे बेटे को पुकारा, जिसका नाम ‘नारायण’ था। भगवान विष्णु ने केवल अपना नाम सुनकर ही सुदर्शन चक्र उठा लिया और अजामिल की रक्षा की। यह दर्शाता है कि भगवान इतने दयालु हैं कि अनजाने में लिया गया नाम भी उन्हें रिझा (प्रसन्न कर) सकता है।

भागवत पुराण के षष्ठ स्कंध में अजामिल की कथा विस्तार से वर्णित है, जहाँ केवल ‘नारायण’ नाम के उच्चारण से विष्णुदूत प्रकट हो जाते हैं।

3. केवट का प्रेम (The Purity of Devotion)

“केवट से सेतिहे में धोवावेल कवन गुणवा से…”

यह इस भजन की सबसे गहरी पंक्ति है। कवि कहता है कि जब भगवान ने वामन अवतार लिया, तब स्वयं ‘ब्रह्मा जी’ ने उनके चरण धोए थे। दूसरी बार, राजा ‘जनक’ ने अपनी पुत्री सीता का कन्यादान करते समय उनके चरण पखारे। यानी चरण धोने वाले ब्रह्मांड के सबसे बड़े देव और राजा थे। लेकिन रामायण में, एक साधारण केवट (मल्लाह) ने बिना कुछ दिए (सेतिहे में / मुफ्त में) उनके चरण धो लिए। भगवान केवल केवट के निश्छल प्रेम और भक्ति से ‘रीझ’ गए थे, किसी पद या प्रतिष्ठा से नहीं।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस (अयोध्या कांड) में केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए लिखा है कि केवट ने प्रभु के चरण धोने का अवसर केवल प्रेमवश माँगा, किसी लोभ या लाभ के लिए नहीं।

4. वानर-भालुओं के साथ हास-परिहास (Finding Joy in Innocence)

“बानर भालू के उल्टा कपड़ा देखी के हंस ठठाके…”

दुनिया में बड़े-बड़े आयोजन होते हैं, राजा-महाराजा अपना ऐश्वर्य दिखाते हैं, लेकिन भगवान वहाँ मौन रहते हैं (मुस्कुराके/शर्मा के रह जाते हैं)। परंतु जब वन में सीधे-सादे वानर और भालू उल्टे-सीधे कपड़े पहनकर और भोली हरकतें करके दिखाते हैं, तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी ठहाके लगाकर हंस पड़ते हैं। ईश्वर को बनावटी तमाशे नहीं, बल्कि हृदय का भोलापन और निश्छल प्रेम प्रिय है।

Bhagwan Rijhela RIjhawela Kaun Gunwa Se

निष्कर्ष (Conclusion)

यह लोक भजन हमें सिखाता है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष गुण, धन, या उच्च कुल की आवश्यकता नहीं है। भगवान केवल ‘सरलता और प्रेम’ के गुण से रीझते हैं, श्रीरामचरितमानस में वर्णित नवधा भक्ति के सर्वोच्च रूप में भी देखा जा सकता है। जो हृदय निर्मल है, वही ईश्वर का सच्चा निवास है। 

यह भजन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर को रिझाने का कोई रहस्यमय सूत्र नहीं है। न विशेष यज्ञ, न वैभव, न दिखावा, केवल सरल हृदय, निष्कपट प्रेम और नाम-स्मरण ही वह ‘गुण’ है जिससे भगवान रीझते हैं। यही इस लोक भजन का शाश्वत संदेश है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. “भगवान रिझेला रीझेवेला कवन गुणवा से” भजन किसने लिखा?

यह एक लोक भजन है, जिसका कोई प्रमाणित रचनाकार उपलब्ध नहीं है। यह पूर्वांचल और भोजपुर क्षेत्र की मौखिक परंपरा से पीढ़ियों से गाया जाता रहा है।

2. यह भजन निर्गुण है या सगुण?

यह भजन दोनों का सुंदर संगम है। इसमें भगवान से सीधा संवाद (निर्गुण शैली) है, जबकि अजामिल और केवट जैसे सगुण प्रसंगों का उल्लेख भी है।

3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इसका मुख्य संदेश यह है कि भगवान पद, प्रतिष्ठा या वैभव से नहीं, बल्कि सरल हृदय और सच्चे प्रेम से प्रसन्न होते हैं।

4. केवट का प्रसंग क्यों महत्वपूर्ण है?

केवट प्रसंग यह दर्शाता है कि ईश्वर के लिए सामाजिक पद नहीं, बल्कि भक्ति का भाव महत्वपूर्ण है। ब्रह्मा और राजा जनक के बाद भी प्रभु ने एक साधारण मल्लाह का प्रेम स्वीकार किया।

डॉ. हिमांशु पांडेय पेशे से एक MBBS चिकित्सक हैं और 'भजन समागम' के संस्थापक हैं। अपनी पारिवारिक जड़ों (सिवान, बिहार) और भारतीय संस्कृति से गहरे जुड़ाव के कारण, उन्होंने इस मंच की शुरुआत की है। उनका उद्देश्य भारतीय भजनों, मंत्रों और व्रत-त्योहारों के पीछे छिपे वास्तविक भावार्थ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है।

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