भूमिका – परंपरा और विज्ञान का संगम
होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है। उससे एक दिन पहले होने वाला Holika Dahan भारतीय संस्कृति में अग्नि, शुद्धि और नवीनीकरण का प्रतीक है। बचपन से हम प्रह्लाद और होलिका की कथा सुनते आए हैं – भक्त की विजय और अहंकार की पराजय।
लेकिन एक चिकित्सक (Doctor) होने के नाते, मैं हमेशा यह भी सोचता रहा हूँ – हमारे पूर्वजों ने इस अग्नि अनुष्ठान के लिए यही तिथि क्यों चुनी? क्या इसके पीछे केवल पौराणिक कथा है, या कोई गहरा प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण भी है?
इस लेख में हम जानेंगे:
- Holika Dahan 2026 Date & Time
- Holika Dahan Puja Vidhi at Home (सरल विधि)
- Scientific Reason: होलिका की अग्नि वातावरण को कैसे शुद्ध करती है?
Table of Contents
Quick Information – Holika Dahan 2026 Date & Time
वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा तिथि को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति हो सकती है, लेकिन पंचांग के अनुसार सटीक समय यहाँ दिया गया है:
| विवरण | जानकारी (Time) |
| Holika Dahan Date | 3 मार्च 2026, मंगलवार |
| Holi (Dhulandi) Date | 4 मार्च 2026, बुधवार |
| Holika Dahan Muhurat | शाम 06:22 से रात 08:50 तक (Best Time) |
| Purnima Tithi Begins | 2 मार्च 2026, शाम 05:55 बजे |
| Purnima Tithi Ends | 3 मार्च 2026, शाम 05:07 बजे |
विशेष नोट: शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन ‘भद्रा काल’ (Bhadra Kaal) में नहीं किया जाता। 3 मार्च 2026 की शाम को भद्रा का साया नहीं है, इसलिए यह समय पूजन के लिए अत्यंत शुभ है।
पौराणिक कथा – प्रह्लाद और होलिका (संक्षेप में)
होलिका दहन की कथा भागवत पुराण से जुड़ी है। हिरण्यकश्यप, जो स्वयं को ईश्वर मानता था, अपने पुत्र प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित था। उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह अग्नि में बैठकर प्रह्लाद को जला दे, क्योंकि उसे वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती।
लेकिन हुआ इसके विपरीत। भक्ति की रक्षा हुई, और होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई।
यह कथा प्रतीक है:
- अहंकार के अंत का
- सत्य की विजय का
- दिव्य संरक्षण का
Scientific Reason Behind Holika Dahan – ऋतु परिवर्तन और अग्नि का विज्ञान
अब इस उत्सव का वह पक्ष, जो अक्सर चर्चा से बाहर रह जाता है।
Holika Dahan फाल्गुन पूर्णिमा के दिन आता है – यह वह समय है जब मौसम सर्दी (Winter) से गर्मी (Summer) की ओर बढ़ता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि यह संक्रमण काल (Seasonal Transition Phase) शरीर और वातावरण के लिए संवेदनशील होता है।
1. ऋतु परिवर्तन और रोगों की संभावना
सर्दियों के बाद तापमान अचानक बदलता है और वातावरण में बैक्टीरिया और कीटाणुओं (Bacteria & Viruses) की वृद्धि तेज होती है। इस समय वायरल फीवर, चिकन पॉक्स और त्वचा रोग अधिक देखने को मिलते हैं।
2. अग्नि का प्राकृतिक कीटाणुनाशक प्रभाव (Natural Fumigation)
जब सामूहिक रूप से सूखी लकड़ी, गोबर के कंडे (Cow Dung Cakes), नीम की पत्तियाँ और कपूर (Camphor) जलाए जाते हैं, तो वातावरण में 140°F से अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- धुएँ में प्राकृतिक जीवाणुरोधी (Anti-bacterial) गुण होते हैं।
- यह प्रक्रिया वातावरण को Sanitize करने का कार्य करती है।
एक चिकित्सक के रूप में मैं यह कह सकता हूँ कि यह परंपरा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य (Community Health) का एक प्राचीन उपाय था।
Read more about it at: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11206849/
Holika Dahan Samagri List (Checklist)
यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो यह सामग्री पहले ही एकत्रित कर लें:
- पूजा थाली: रोली, अक्षत (चावल), फूल, हल्दी।
- हवन सामग्री: शुद्ध देसी घी (Pure Ghee), भीमसेनी कपूर (Camphor), गुड़।
- प्रसाद: गेहूँ की बालियाँ, चने का होरहा।
- बंधन: कच्चा सूत (मौली)।
- इंधन: लकड़ी और गोबर के कंडे (Badkulla)।

Holika Dahan Puja Vidhi at Home – Step-by-Step
Step 1: स्थान चयन
घर के बाहर या मोहल्ले में सुरक्षित स्थान चुनें। ध्यान रखें कि ऊपर बिजली के तार न हों।
Step 2: स्थापना
लकड़ी और गोबर के कंडों से होलिका का ढेर बनाएं। प्रह्लाद के प्रतीक रूप में एक लकड़ी का डंडा बीच में रखें (जिसे दहन से पहले निकाल लिया जाता है)।
Step 3: परिक्रमा और पूजन
होलिका के चारों ओर कच्चा सूत (Raw Cotton Thread) लपेटते हुए 3 या 7 बार परिक्रमा करें। हर परिक्रमा के साथ परिवार की सुख-शांति की कामना करें। जल, रोली और अक्षत अर्पित करें।
Step 4: अग्नि प्रज्वलन
कपूर और घी की सहायता से अग्नि प्रज्वलित करें। अग्नि में गुड़ और गेहूँ की बालियाँ अर्पित करें।
Step 5: भस्म धारण
अगली सुबह, होलिका की ठंडी राख (भस्म) को माथे पर लगाना शुभ माना जाता है।
होलिका की अग्नि के समक्ष बैठकर मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप और सिद्धि करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
बिहार (सिवान) की परंपरा – एक स्थानीय स्पर्श
मेरी पारिवारिक जड़ें Siwan (Bihar) से जुड़ी हैं। वहाँ होलिका दहन का स्वरूप अत्यंत जीवंत होता है।
वहाँ गोबर से विशेष माला के आकार के “बड़कुल्ला” (Badkulla) बनाए जाते हैं। बच्चे और बुज़ुर्ग मिलकर “फाग” और “जोगीरा” गाते हैं। अग्नि में सेंकी हुई गेहूँ की बालियों को घर लाकर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। यह केवल पूजा नहीं, सामूहिक उल्लास और लोकसंस्कृति का उत्सव है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Holika Dahan 2026 केवल पंचांग की तारीख नहीं है। यह आस्था, विज्ञान और सामाजिक जीवन के संतुलन का पर्व है। प्रह्लाद की कथा हमें ‘विश्वास’ सिखाती है, और अग्नि का विज्ञान हमें ‘शुद्धि’।
आप सभी को भजन समागम परिवार की ओर से होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: क्या महिलाएँ होलिका दहन कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा से होलिका दहन की पूजा कर सकती हैं। व्रत और पूजा में कोई निषेध नहीं है।
Q2: होलिका दहन 2026 में भद्रा का समय क्या है?
3 मार्च 2026 को शाम के समय (प्रदोष काल) भद्रा नहीं रहेगी। भद्रा का साया 3 मार्च की सुबह ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए शाम को पूजा नि:संकोच करें।
Q3: होलिका दहन की राख का क्या करें?
होलिका की राख को बहुत पवित्र माना जाता है। इसे चांदी की डिब्बी में रखने से घर में बरकत बनी रहती है।